यूपीएससी में बनी सेंकड टॉपर: प्री में एक अंक से चूकी, प्राइवेट जॉब छोड़ी, डेढ़ साल बच्चे से दूर रहकर की तैयारी

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upsc second topper anu kumari exclusive interview: CAknowledge से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि कठिन हालात में कैसे खुद को तैयार किया। check out our exclusive UPSC IAS Interviews in Hindi and English Language.

यूपीएससी में बनी सेंकड टॉपर

सोनीपत. संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के शुक्रवार को घोषित नतीजों में सोनीपत की अनु कुमारी ने देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया है। मूल रूप से पानीपत के दिवाना गांव की रहने वाले बलजीत सिंह की बेटी अनु की इस कामयाबी से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। जयपुर गोल्डन अस्पताल दिल्ली से सेवानिवृत्त पिता बलजीत सिंह, मां संतरा, बेटे विनित और नितिन सभी इस कामयाबी पर बहुत खुश हैं। CAknowledge से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि यूपीएससी में बनी सेंकड टॉपर बनने से पहले वक प्री में एक अंक से चूक गई थीं। इसकी तैयारी करने उन्होंने प्राइवेट जॉब छोड़ी और डेढ़ साल बच्चे से दूर रहकर की तैयारी कर ये मुकाम पाया।

Q. सवाल कब लगा की आपको आईएएस की तैयारी करनी चाहिए?

A. चाहती तो बचपन से ही थी, लेकिन गुड़गांव में कुछ साल जॉब करने के बाद यूं लगने लगा कि कुछ नया नहीं हो रहा है तथा जब तक जॉब होगी तब तक कुछ कर भी नहीं सकूंगी, इसलिए जॉब छोड़ दी। फिर सिर्फ डेढ़ महीने की तैयारी के आधार पर प्री एग्जाम दिया, लेकिन एक अंक से क्लियर करने से चूक गई।

Q. ऐसे में कैसे खुद को तैयार किया?

A. खुद को मानसिक तौर पर तैयार किया। जब डेढ़ महीने में इतने करीब आ सकते हैं तो और मेहनत कर कामयाबी हासिल भी की जा सकती है।

Q. सबसे बड़ी अड़चन क्या थी सामने व उसे कैसे दूर किया?

A. अड़चन कुछ नहीं, बस पूरा ध्यान इसी पर लगाना चाहती थी, इसलिए बच्चे को अपनी मां के पास छोड़ा और खुद अपनी मौसी नीलम के यहां रहकर पढ़ाई की। यहां पति से लेकर अपने घरवालों का पूरा सहयोग मिला।

Q. छोटे से बच्चे को छोड़कर यूं पढ़ना कितना मुश्किल था?

A. बहुत मुश्किल था, लेकिन परिजनों ने पूरा सपोर्ट किया, मेरा भी निरंतर हौसला बढ़ाया। मेरे अंदर की मां जागती तो तकलीफ तो होती थी, लेकिन चूंकि लक्ष्य बनाया हुआ था तो उससे पीछे नहीं हट सकती थी।

Q. तैयारी किस तरह से की?

A. काफी हद तक सेल्फ स्टडी की। कोचिंग सेंटरों के भरोसे नहीं रही। डीयू से बीएससी की हुई थी, काफी सब्जेक्ट की नॉलेज थी। इसके बाद ऑनलाइन स्टडी की। स्पेशल टॉपिक बनाकर उस पर अभ्यास किया। पढ़ाई को भी स्टेप बाय स्टेप किया। इसलिए मुश्किल नहीं हुई।

Q. क्या भरोसा था देशभर में दूसरा रैंक हासिल होगा?

A. कामयाबी का तो पूरा भरोसा था, लेकिन रैंक के बारे में नहीं सोचा था। अच्छा लग रहा है कि देश में दूसरा स्थान हासिल किया है।

Q. अब क्लियर कर लिया है तो क्या चल रहा है दिमाग में?

A. यही कि अच्छे से ट्रेनिंग कर जो काम मिलेगा उसे पूरी ईमानदारी के साथ करना है।

Q. हरियाणा को लेकर आपकी क्या सोच है?

A. हरियाणा एक उभरता हुआ राज्य है, लेकिन बड़ी परेशानी लड़कियों के प्रति बढ़ते हुए अपराध है, जोकि एक खुशहाल प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।

Q. ऐसी स्थिति में ऐसा क्या हो जिससे हालत में सुधार हो?

A. सबसे जरूरी है कि दूसरों से उम्मीद करने से पहले खुद को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करना होगा। हाल में मानुषी छिल्लर एवं खेलों में लड़कियों ने पूर्व में ऐसा किया है और भविष्य में भी और लड़कियां ऐसा कर सकती है। इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चों पर भरोसा भी दिखाना होगा।

Q. अपनी कामयाबी का श्रेय किसे देना चाहेंगी?

A. अपने परिजनों को, जिन्होंने हमेशा मेरे फैसले में अपना साथ दिया, कभी हौसला कम नहीं होने दिया, आगे बढ़कर हर परेशानी को दूर करने में मेरी मदद की।

Seconds topper in UPSC, Anu kumari Special interview

missed a job with a number in pre, leaving a private job, staying away from child for one and a half years.

Anu Kumari of Sonipat has secured second place in the country in the results announced on Friday of the Union Public Service Commission’s examination. Retired father Baljit Singh, mother orange, son Vinit and Nitin from Jaipur Golden Hospital Delhi are all very happy about this success. In a special dialogue with CAknowledge, he told that before becoming a secular topper in UPSC, Waq was missing from one point in pre-election. To prepare for this, he left the private job and stayed away from the child for one and a half years and prepared for this.

Q. When did you think that you should prepare for the IAS?

A. I wanted to be this from his childhood, but after working for a few years in Gurgaon, I started feeling that something is not new and I will not be able to do anything till the job, so leave the job. Then only gave pre-examination based on the preparation of one-and-a-half month, but missed by clearing with a single digit.

Q. How to prepare yourself like this?

A. Prepare yourself mentally. When one can come so close in one and a half months, success can be achieved even harder.

Q. What was the biggest obstacle in front and how did it overcome?

A. The hitch was nothing, just wanted to put the full attention on it, so the child left his mother and studied by staying in his own aunt Neelam. Here husband and his family get full support.

Q. It was so difficult to read except for a small child?

A. It was very difficult, but the families supported the whole, continued to encourage me. The mother inside me was in trouble, but since the goal was made, she could not move behind him.

Q. What kind of preparation?

A. To a large extent self study. Coaching centers have not been trusted. Due to BSc, there was a lot of subject knowledge. After this online study. Practiced a special topic by doing it. Step by step also made studies. That was not so difficult.

Q. What was the confidence that the second rank would be achieved across the country?

A. There was complete trust in success, but did not think about rank. It looks good that the country has achieved second place.

Q. Now that you have cleared, what is going on in the brain?

A. That is the best thing to do in training with good honesty.

Q. What do you think about Haryana?

A. Haryana is an emerging state, but big trouble is a growing crime against girls, which harm the image of a happy state.

Q. What is the situation in such a situation that improve the condition?

A. The most important thing is to present yourself as an example before expecting others. Recently, Manishi Chillar and Girls have done this in the past and more girls can do this in the future. Therefore, parents also need to show their trust in their children.

Q. Who would give credit to your success?

A. Our family, who always supported me in my decision, never gave up on encouragement, helped me overcome all the troubles and went ahead.

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